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    कार इंश्योरेंस में एक वर्ष में कितने क्लेम किए जा सकते हैं?

    • मोटर ब्लॉग

    • 26 फरवरी 2026

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      बजाज जनरल इंश्योरेंस

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      176 बार देखा गया

    आबादी और आय में होती बढ़ोत्तरी के साथ-साथ सड़कों पर वाहनों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हो गई है. इससे सड़क पर सुरक्षित रूप से चलना मुश्किल हो गया है. रोज़ाना होने वाली दुर्घटनाओं में बहुत वृद्धि हो गई है, साथ ही गंभीर दुर्घटनाओं की संख्या भी पहले की तुलना में कई गुना अधिक हो गई है. सड़क दुर्घटनाओं के कारण होने वाली मृत्यु की दर में भी वृद्धि हुई है. इससे न केवल पता चलता है कि हमें सावधानी से वाहन चलाने की आवश्यकता है, बल्कि इससे कार इंश्योरेंस के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण बातों की भी जानकारी मिलती हैं. ऐसी बहुत सी बातें हैं, जिनका कार इंश्योरेंस, खरीदते समय और इसके लिए क्लेम करते समय ध्यान रखना चाहिए. यहां हम अक्सर पूछे जाने वाले एक सवाल का जवाब दे रहे हैं कि आप कितनी बार कार इंश्योरेंस का क्लेम कर सकते हैं?

    कार इंश्योरेंस में कितने क्लेम किए जा सकते हैं?

    आप कितनी बार इंश्योरेंस क्लेम कर सकते हैं, इसको लेकर इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) की ओर से कोई लिमिट निर्धारित नहीं की गई है. इसलिए, आप अपने इंश्योरर के पास कई क्लेम फाइल कर सकते हैं और अगर वो क्लेम मान्य होंगे, तो उन्हें स्वीकार कर लिया जाएगा. लेकिन, आपको बार-बार इंश्योरेंस क्लेम नहीं करने का सुझाव दिया जाता है, खास तौर पर मामूली रिपेयरिंग के मामले में. ऐसा करने पर आपका नो-क्लेम बोनस प्रभावित होता है. NCB या नो क्लेम बोनस एक अतिरिक्त लाभ है, जो आपके प्रीमियम को कम करने में मदद करता है. उदाहरण के तौर पर, अगर आप बंपर को हुए नुकसान की मामूली रिपेयरिंग या टूटे हुए मिरर के लिए क्लेम करते हैं, तो ये सही फैसला नहीं है. केवल बड़ी राशि के नुकसान के लिए क्लेम करना ही उचित है.

    कुछ खास परिस्थितियों में लोग इंश्योरेंस क्लेम न करने का सुझाव क्यों देते हैं?

    सबसे पहले, जब आप अपने कार इंश्योरेंस के तहत कुछ भी क्लेम करते हैं, तो 'नो क्लेम बोनस' सीधे प्रभावित होता है. अगर आप पिछले वर्ष में दी गई पॉलिसी के तहत कुछ भी क्लेम नहीं करते हैं, तो नो क्लेम बोनस आपको अगले वर्ष भुगतान किए जाने वाले प्रीमियम पर मिलने वाली छूट है. यह 20% से 50% तक होता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कोई क्लेम कितने समय तक नहीं किया है. अब, अगर आप कोई क्लेम करते हैं, तो आपको दोबारा शुरू करना होगा, और वर्षों के लिए सभी संचित छूट एक शॉट में चली जाती है. बार-बार क्लेम करने से कस्टमर की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है और अगले वर्षों में भुगतान किए जाने वाले प्रीमियम पर असर पड़ता है. बार-बार क्लेम करने से पॉलिसी का रिन्यूअल अधिक महंगा हो सकता है. यह भी ध्यान में रखा जाएगा कि मरम्मत की लागत बहुत अधिक होने पर क्लेम करना बेहतर है.

    कई कार इंश्योरेंस क्लेम करने से क्या प्रभाव पड़ता है?

    जैसा कि ऊपर बताया गया है, इसकी कोई लिमिट नहीं है कि कितनी बार क्लेम फाइल किए जा सकते हैं. लेकिन आपको यह पता होना चाहिए कि आपको क्लेम कब फाइल करना है. यहां पर कुछ चीज़ों के बारे में बताया गया है, जिनसे आप समझ सकते हैं कि अक्सर क्लेम करने का प्रभाव क्या हो सकता है:

    1. NCB लाभ का नुकसान

    नो-क्लेम बोनस या NCB वह लाभ है जो इंश्योरेंस कंपनियां क्लेम न करने पर प्रदान करती हैं. यह बोनस रिन्यूअल प्रीमियम में मार्कडाउन के रूप में उपलब्ध है. ऐसे मार्कडाउन का प्रतिशत ओन-डैमेज प्रीमियम के 20% से शुरू होता है और प्रत्येक लगातार क्लेम-फ्री पॉलिसी अवधि के साथ 5वें वर्ष के अंत में 50% तक बढ़ जाता है. इसलिए, जब आप इंश्योरेंस क्लेम करते हैं, तो रिन्यूअल लाभ की यह राशि शून्य हो जाती है. अधिक जानकारी के लिए कृपया IRDAI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं.

    2. प्रीमियम राशि का रीस्टोरेशन

    बार-बार इंश्योरेंस क्लेम करने का एक और नुकसान यह है कि आपका कम्प्रीहेंसिव कार इंश्योरेंस प्रीमियम उसकी मूल राशि में रीस्टोर कर दिया जाता है. हालांकि NCB शून्य हो जाता है, लेकिन आपका प्रीमियम इसकी मूल राशि में रीस्टोर कर दिया जाता है, जिससे आपको अपनी आवश्यकता से अधिक भुगतान करना होता है.

    3. ज़ीरो-डेप्रिसिएशन कवर के मामले में लिमिट

    अगर आपने स्टैंडर्ड इंश्योरेंस प्लान के साथ ज़ीरो-डेप्रिसिएशन ऐड-ऑन ले रखा है, तो आपकी पॉलिसी पार्ट्स के रिप्लेसमेंट के साथ-साथ उनके डेप्रीसिएशन के लिए भी कवरेज प्रदान करती है. क्योंकि ये ऐड-ऑन स्टैंडर्ड पॉलिसी कवर से अलग लिए जाते हैं, इसलिए उनकी शर्तें इंश्योरेंस कंपनी द्वारा परिभाषित होती हैं. इसलिए, इन शर्तों के तहत एक लिमिट हो सकती है, जिसके अनुसार तय किया जाएगा कि इंश्योरेंस क्लेम के तहत डेप्रीसिएशन कवर की राशि कितनी बार प्रदान की जा सकती है.

    4. बजट से बाहर का खर्च: डिडक्टिबल

    जब आप इंश्योरेंस क्लेम करते हैं, तो डिडक्टिबल वह राशि है जिसका भुगतान आपको अपनी जेब से करना पड़ता है. डिडक्टिबल दो प्रकार के होते हैं - अनिवार्य और स्वैच्छिक. अनिवार्य डिडक्टिबल IRDAI द्वारा तय किए जाते हैं और स्वैच्छिक डिडक्टिबल आपकी पॉलिसी की शर्तों के अनुसार तय किए जाते हैं. जिनका भुगतान आपको क्लेम करते समय करना होता है.

    अगर कई कार इंश्योरेंस क्लेम किए जाते हैं, तो क्या होगा?

    जैसा कि ऊपर बताया गया है, क्लेम नंबर पर कोई सीमा नहीं है. फिर भी, मोटर इंश्योरेंस क्लेम फाइल करते समय ध्यान रखना बेहतर है. यहां हमने कुछ प्रमुख कारणों को सूचीबद्ध किया है जो हमें यह समझने में सक्षम बनाते हैं कि कई कार इंश्योरेंस क्लेम फाइल नहीं किए जाने चाहिए:

    1. कार इंश्योरेंस प्रीमियम में वृद्धि: एक वर्ष में कई क्लेम फाइल करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए, इंश्योरेंस कंपनी प्रीमियम बढ़ा सकती है, जबकि कार इंश्योरेंस रिन्यूअल. कई क्लेम का मतलब है कि व्यक्ति को इंश्योरर के लिए उच्च जोखिम होता है. इसे कवर करने के लिए इंश्योरर कार इंश्योरेंस प्रीमियम को बढ़ा सकता है.
    2. नो क्लेम बोनस: नो क्लेम बोनस मूल रूप से पिछली पॉलिसी अवधि के दौरान कोई क्लेम न करने पर अर्जित प्रीमियम पर डिस्काउंट है. प्रत्येक लगातार क्लेम-फ्री वर्ष के साथ डिस्काउंट का प्रतिशत बढ़ जाता है. अगर आप पांच वर्षों के लिए कोई कार इंश्योरेंस क्लेम फाइल नहीं करते हैं, तो यह डिस्काउंट आसानी से 50% तक जा सकता है. इसका मतलब है कि अगर आप कार इंश्योरेंस क्लेम करते हैं, तो आप NCB का स्टेटस खो देंगे. एक अच्छा तरीका यह है कि नुकसान की मरम्मत की लागत को समझें. क्लेम केवल तभी करें जब मरम्मत की लागत NCB डिस्काउंट से अधिक हो.
    3. डिडक्टिबल: जब मरम्मत की लागत पॉलिसी शिड्यूल में उल्लिखित डिडक्टिबल से कम या केवल अधिक होती है, तो क्लेम फाइल न करें. अगर आप कार इंश्योरेंस क्लेम फाइल करते हैं, तो डिडक्टिबल के कारण अपर्याप्त क्षतिपूर्ति प्राप्त होगी.

    कब क्लेम नहीं करना है, यह कैसे तय करें?

    अब आप जान गए हैं कि कार इंश्योरेंस क्लेम करने की कोई सीमा नहीं है; तो आपको यह जानना होगा कि कब क्लेम नहीं करना चाहिए. इसलिए यहां उन परिस्थितियों के बारे में बताया गया है, जिनमें क्लेम न करने का सुझाव दिया जाता है

    जब 'नो क्लेम बोनस' मरम्मत की लागत से अधिक होता है: जब इंश्योरेंस प्रीमियम पर प्राप्त नो क्लेम बोनस की राशि कार पर मरम्मत के खर्च से अधिक होती है, तो इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत कुछ भी क्लेम न करने की सलाह दी जाती है.

    जब मरम्मत की राशि डिडक्टिबल से अधिक नहीं होती है: डिडक्टिबल आपके द्वारा इंश्योरेंस का क्लेम करने पर देय क्लेम राशि का हिस्सा होता है. अगर आपके द्वारा देय राशि डिडक्टिबल से अधिक नहीं है, तो आपको इंश्योरेंस कंपनी से कुछ भी नहीं मिलेगा.

    ऐसे में जब आपको क्लेम करके किसी भी चीज़ का लाभ नहीं मिलने वाला, तो क्लेम न करने पर मिलने वाले लाभों को पाने से क्यों चूकें? इसके अलावा, यह भी ध्यान रखें कि अगर आप एक क्लेम के तहत एक राशि के लिए क्लेम फाइल कर रहे हैं और वह राशि दो अलग-अलग घटनाओं से संबंधित है, तो दोनों घटनाओं के लिए डिडक्टिबल अलग-अलग लागू होगा.

    जब कोई थर्ड पार्टी आपके खर्चों का भुगतान कर सकती है: ऐसे समय होते हैं जब आपके साथ कोई दुर्घटना होती है, तो आपको हुए नुकसान का भुगतान करना होता है. इसलिए इसका लाभ उठाएं और कुछ अतिरिक्त समय के लिए अपने इंश्योरेंस को बचाएं.

    इसलिए, नुकसान कितना हुआ है, डिडक्टिबल की लिमिट कितनी है, 'नो क्लेम बोनस' पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इन सब बातों का आकलन करने के बाद ही क्लेम करें. जैसे क्लेम करने के लिए आकलन करना ज़रूरी है, वैसे ही यह जानना ज़रूरी है कि जब आवशयकता हो, तब कार इंश्योरेंस के लिए क्लेम कैसे करें आप.

    क्या क्लेम फाइल करने के कारण मुझे बाद के पॉलिसी वर्षों में अधिक प्रीमियम का भुगतान करना होगा?

    ऐसी बहुत सी चीज़ें हैं, जो निर्धारित करती हैं कि आपकी पॉलिसी का इंश्योरेंस प्रीमियम क्या होगा जो कई चीज़ों पर निर्भर करता है, जैसे IDV यानी इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू में होने वाले बदलाव, प्रीमियम की राशि, क्लेम का प्रकार, जैसे क्लेम पॉलिसीधारक की गलती के कारण फाइल किया गया है या फिर थर्ड-पार्टी की गलती से, साथ ही कुछ अन्य कारण भी हैं. इसलिए क्लेम की संख्या और इंश्योरेंस प्रीमियम के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है.

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    क्या इंश्योरेंस क्लेम सबमिट करने की कोई समय-सीमा है?

    नहीं, क्लेम सबमिट करने के लिए कोई समय-सीमा नहीं है, लेकिन आपको जल्द से जल्द इसे सबमिट करने की सलाह दी जाती है, जिससे इंश्योरेंस कंपनी इस देरी को आधार बनाकर आपके क्लेम को अस्वीकार न कर सके.

    रज़िया ने पूछा, मैंने कार इंश्योरेंस के लिए एक बार क्लेम किया है, लेकिन मेरी IDV समाप्त नहीं हुई है. क्या मैं उसी पॉलिसी के तहत एक बार फिर से क्लेम कर सकती हूं?

    कार इंश्योरेंस के लिए कितने क्लेम किए जा सकते हैं, इसकी कोई सीमा नहीं है, बशर्ते कि वे IDV के भीतर हों. इसलिए, आप उस पॉलिसी की राशि के तहत क्लेम कर सकती हैं.

    एक वर्ष में अधिकतम कितने क्लेम की अनुमति है?

    अनुमति प्राप्त क्लेम की संख्या पर कोई विशिष्ट लिमिट नहीं है, लेकिन अत्यधिक क्लेम आपके नो क्लेम बोनस (NCB) को प्रभावित कर सकते हैं और पॉलिसी रिन्यूअल की शर्तों को प्रभावित कर सकते हैं.

    क्या कार एक्सीडेंट क्लेम की कोई लिमिट है?

    हालांकि अधिकांश पॉलिसी एक्सीडेंट क्लेम की संख्या पर कोई सीमा निर्धारित नहीं करती हैं, लेकिन बार-बार क्लेम करने पर पॉलिसी रिन्यूअल के दौरान अधिक प्रीमियम या कठोर शर्तें हो सकती हैं.

    एक वर्ष में कितने क्लेम की अनुमति है?

    आप अपनी पॉलिसी की शर्तों के अनुसार एक वर्ष में कई क्लेम फाइल कर सकते हैं, लेकिन बार-बार क्लेम करने से आपके लाभ प्रभावित हो सकते हैं, जैसे नो क्लेम बोनस (NCB).

    *मानक नियम व शर्तें लागू

    *बीमा आग्रह की विषयवस्तु है. लाभों, शामिल न की गई चीज़ों, सीमाओं, नियमों और शर्तों के बारे में और जानकारी के लिए, खरीद पूरी करने से पहले कृपया सेल्स ब्रोशर/पॉलिसी शब्दावली को ध्यान से पढ़ें.

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